Sanskrit-shlokas-on-karma
श्रीमद् भागवत गीता श्लोक

Sanskrit shlokas on karma | कर्म पर संस्कृत में श्लोक

Sanskrit shlokas on karma | कर्म पर संस्कृत में श्लोक  यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत। अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥ हिंदी अर्थ: हे भारत! जब-जब धर्म की हानि और अधर्म का उदय होता है, तब-तब मैं स्वयं को सृष्टि करता हूँ।  कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥ हिंदी अर्थ: तुम्हारा अधिकार कर्म करने में ही है, फलों […]

Tukaram Maharaj
संत तुकाराम महाराज गाथा / अभंग

Tukaram Maharaj | संत तुकाराम महाराज अभंग गाथा १८०१  ते १९०० – Copy

Tukaram Maharaj | संत तुकाराम महाराज अभंग गाथा १८०१  ते १९०० | Sant Tukaram Maharaj Abhang Gatha 1801 to 1900 संत तुकाराम महाराज अभंग गाथा १८०१  ते १९०० संत तुकाराम महाराज सार्थ तुकाराम गाथा / अभंग, मराठी अर्थासह अभंग क्र.१८०१ म्हणसी होऊनी निश्चिंता । हरूनियां अवघी चिंता । मग जाऊं एकांताभजन करूं । संसारसंभ्रमें आशा

Tukaram Maharaj
संत तुकाराम महाराज गाथा / अभंग

Tukaram Maharaj | संत तुकाराम महाराज अभंग गाथा १८०१  ते १९००

Tukaram Maharaj | संत तुकाराम महाराज अभंग गाथा १८०१  ते १९०० | Sant Tukaram Maharaj Abhang Gatha 1801 to 1900 संत तुकाराम महाराज अभंग गाथा १८०१  ते १९०० संत तुकाराम महाराज सार्थ तुकाराम गाथा / अभंग, मराठी अर्थासह अभंग क्र.१८०१ म्हणसी होऊनी निश्चिंता । हरूनियां अवघी चिंता । मग जाऊं एकांताभजन करूं । संसारसंभ्रमें आशा

BHAGAVAD GITA
श्रीमद् भागवत गीता श्लोक

SRIMAD BHAGAVAD GITA श्रीमद्भगवद्गीता श्लोक

SRIMAD BHAGAVAD GITA | श्रीमद्भगवद्गीता संस्कृत श्लोक | Hindi-English(द्वितीयोऽध्याय)२१-३० प्रसंग उन्नीसवें श्लोक में भगवान् ने यह बात कही कि आत्मा न तो किसी को मारता है और न किसी के द्वारा मारा जाता है; उसके अनुसार बीसवें श्लोक में उसे विकार रहित बतलाकर इस बात का प्रतिपादन किया कि वह क्यों नहीं मारा जाता। अब अगले श्लोक

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श्रीमद् भागवत गीता श्लोक

SRIMAD BHAGAVAD GITA | श्रीमद्भगवद्गीता संस्कृत श्लोक | Hindi-English(द्वितीयोऽध्याय)11-20

SRIMAD BHAGAVAD GITA | श्रीमद्भगवद्गीता संस्कृत श्लोक | Hindi-English(द्वितीयोऽध्याय)11-20 प्रसंग – अर्जुन को अधिकारी समझकर उसके शोक और मोह को सदा के लिये नष्ट करने के उद्देश्य से भगवान् पहले नित्य और अनित्य वस्तु के विवेचन पूर्वक सांख्ययोग की दृष्टि से भी युद्ध करना कर्तव्य है, ऐसा प्रतिपादन करते हुए सांख्यनिष्ठा का वर्णन करते हैं- प्रसंग –

SRIMAD BHAGAVAD GITA
श्रीमद् भागवत गीता श्लोक

SRIMAD BHAGAVAD GITA | श्रीमद्भगवद्गीता संस्कृत श्लोक | Hindi-English(द्वितीयोऽध्याय)1-10

SRIMAD BHAGAVAD GITA | श्रीमद्भगवद्गीता संस्कृत श्लोक | Hindi-English(द्वितीयोऽध्याय)1-10 प्रसंग – भगवान् श्रीकृष्ण ने अर्जुन से क्या बात कही और किस प्रकार उसे युद्ध के लिये पुनः तैयार किया; यह सब बतलाने की आवश्यकता होने पर सञ्जय अर्जुन की स्थितिका वर्णन करते हुए दूसरे अध्याय का आरम्भ करते हैं一 प्रसंग – भगवान् के इस प्रकार कहने पर

srimad bhagavad gita
श्रीमद् भागवत गीता श्लोक

SRIMAD BHAGAVAD GITA | श्रीमद्भगवद्गीता संस्कृत श्लोक | Hindi-English | 31-44

SRIMAD BHAGAVAD GITA | श्रीमद्भगवद्गीता संस्कृत श्लोक | Hindi-English प्रसंग – अपनी विषादयुक्त स्थितिका वर्णन करके अब अर्जुन अपने विचारों के अनुसार युद्ध का अनौचित्य सिद्ध करते हैं-(srimad bhagavad gita Shlok) निमित्तानि च पश्यामि विपरीतानि केशव । न च श्रेयोऽनुपश्यामि हत्वा स्वजनमाहवे ।। ३१ ।। हे केशव ! मैं लक्षणों को भी विपरीत ही देख

Sanskrit Shlok
श्रीमद् भागवत गीता श्लोक

Sanskrit Shlok श्रीमद्भगवद्गीता संस्कृत श्लोक / Hindi-English 2024

Sanskrit Shlok श्रीमद्भगवद्गीता संस्कृत श्लोक / Hindi-English अनन्तविजयं राजा कुन्ती पुत्रो युधिष्ठिरः । नकुलः सहदेवश्च सुघोषमणिपुष्पकौ ।। १६ ।। कुन्ती पुत्र राजा युधिष्ठिर ने अनन्त विजय नामक और नकुल तथा सहदेव ने सुघोष और मणिपुष्पक नामक शंख बजाये ।। १६ ।। King Yudhisthira, son of Kunti, blew his conch Anantavijaya; while Nakula and Sahadeva blew

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श्रीमद् भागवत गीता श्लोक

Sanskrit Shlok श्रीमद्भगवद्गीता संस्कृत श्लोक 2024

Sanskrit Shlok श्रीमद्भगवद्गीता संस्कृत श्लोक श्रीमद्भगवद्गीता संस्कृत श्लोक 1 धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः । मामकाः पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत सञ्जय ।।१।। धृतराष्ट्र बोले- हे सञ्जय ! धर्मभूमि कुरुक्षेत्र में एकत्रित, युद्ध की इच्छा वाले मेरे और पाण्डु के पुत्रों ने क्या किया ? ।। १ ।। प्रसंग – धृतराष्ट्र के पूछने पर सञ्जय कहते हैं- (Sanskrit Shlok)

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