Women-Empowerment-Quotes-in-Hindi
प्रेरणादायक संस्कृत श्लोक

Women Empowerment Quotes in Hindi | नारी के सम्मान श्लोक 5

Women Empowerment Quotes in Hindi | नारी के सम्मान श्लोक नारी के सम्मान और महिमा को व्यक्त करने वाले कई श्लोक हिन्दू धर्मग्रंथों में मिलते हैं। यहाँ कुछ प्रमुख श्लोक दिए जा रहे हैं: महिला के प्रति सम्मान: यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः। यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः क्रियाः॥ अर्थ: जहाँ नारियों का सम्मान होता […]

Sanskrit-shlokas-on-karma
श्रीमद् भागवत गीता श्लोक

Sanskrit shlokas on karma | कर्म पर संस्कृत में श्लोक

Sanskrit shlokas on karma | कर्म पर संस्कृत में श्लोक  यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत। अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥ हिंदी अर्थ: हे भारत! जब-जब धर्म की हानि और अधर्म का उदय होता है, तब-तब मैं स्वयं को सृष्टि करता हूँ।  कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥ हिंदी अर्थ: तुम्हारा अधिकार कर्म करने में ही है, फलों

महापुरुषांचे प्रेरणादायी विचार संस्कृत श्लोक मध्ये

Kavi Kalash Shlok | कवी कलश श्लोक 5

Kavi Kalash Shlok | कवी कलश श्लोक 5 श्लोक 1 सद्वृत्तात्मविमानेयं, व्रतशीलधृतिः। त्रैलोक्ये श्रीशिवाचार्य, राज्ञां श्रेष्ठतमोऽभवत्॥ हिंदी अर्थ: यह सद्वृत्त, आत्मनिष्ठ, व्रतशील और धैर्यवान राजा त्रैलोक्य में श्रेष्ठतम शिवाचार्य कहलाता है। मराठी अर्थ: हे सद्वृत्त, आत्मनिष्ठ, व्रतशील आणि धैर्यवान राजा त्रैलोक्यात श्रेष्ठ शिवाचार्य म्हणून ओळखले जातात. श्लोक 2 श्रीमान् योगिराजः श्रीसहजानन्दभगवान् जगतां पतिः। श्रीशिवाजिनृपः सद्भक्तजनमंगलकारकः॥

Shiv Panchakshara
स्तोत्र

Shiv Panchakshara Stotram | शिव पंचाक्षर स्तोत्रम् 5

Shiv Panchakshara Stotram | शिव पंचाक्षर स्तोत्रम् 5 शिव पंचाक्षर स्तोत्रम् – श्लोक १: नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय भस्माङ्गरागाय महेश्वराय। नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय तस्मै नकाराय नमः शिवाय॥ Hindi Meaning: नागराज को हार के रूप में धारण करने वाले, तीन नेत्रों वाले, भस्म को शरीर पर मलने वाले, महेश्वर, नित्य, शुद्ध, दिगम्बर (जो दिशाओं को वस्त्र के रूप

sant_1
आरत्या

Sant Aarti | आरती संतांची

Sant Aarti | आरती संतांची आरती संतमंडळी । हातीं घेउनिं पुष्पांजुळि ओंवाळिन पंचप्राणें । त्याचें चरण न्याहाळी ॥ धृ. ॥ मच्छेंद्र गोरख ॥ गैनी निवृत्तीनाथ । ज्ञानदेव नामदेव ॥ खेचर विसोबा संत । सोपान चांगदेव ॥ गोरा जगमित्र भक्त ॥ कबीर पाठक नामा ॥ चोखा परसा भागवर ॥ आरती ॥ १ ॥ भानुदास कृष्णदास ।

स्तोत्र

Stotra Shri Mahalakshmi | श्रीमहालक्ष्मीस्तोत्र 1

Stotra Shri Mahalakshmi | श्रीमहालक्ष्मीस्तोत्र अथ श्रीमहालक्ष्मीस्तोत्रम् ।      श्री गणेशाय नमः ॥ पद्मे पद्मपलाशाक्षि जय त्वं श्रीपतिप्रिये । Stotra Shri Mahalakshmi जयमातर्महालक्ष्मि संसारार्णवतारिणि ॥१॥ Stotra Shri Mahalakshmi महालक्ष्मि नमस्तुभ्यं नमस्तुभ्यं सुरेश्वरि । हरिप्रिये नमस्तुभ्यं नमस्तुभ्यं दयानिधे ॥२॥ पद्मालये नमस्तुभ्यं नमस्तुभ्यं च सर्वदे । सर्वभूताहितार्थाय वसुवृष्टिं सदा कुरु ॥3॥ जगन्मातर्नमस्तुभ्यं नमस्तुभ्यं दयानिधे । दयावति नमस्तुभ्यं विश्वेश्वरि

Mahadev
आरत्या

Mahadev Aarti | शंकराची आरती

Mahadev Aarti | शंकराची आरती लवथवती विक्राळा ब्रह्मांडी माळा । विषे कंठ काळा त्रिनेत्री ज्वाळा । लावण्यसुंदर मस्तकी बाळा । तेथुनिया जळ निर्मळ वाहे झुळझुळा ॥ १ ॥ जय देव जय देव जय श्री शंकरा । आरती ओवाळू तुज कर्पुरगौरा ॥ धृ० ॥ कर्पुरगौरा भोळा नयनी विशाळा । अर्धांगी पार्वती सुमनांच्या माळा । विभूतीचे उधळण

Tukaram Maharaj
संत तुकाराम महाराज गाथा / अभंग

Tukaram Maharaj | संत तुकाराम महाराज अभंग गाथा १८०१  ते १९०० – Copy

Tukaram Maharaj | संत तुकाराम महाराज अभंग गाथा १८०१  ते १९०० | Sant Tukaram Maharaj Abhang Gatha 1801 to 1900 संत तुकाराम महाराज अभंग गाथा १८०१  ते १९०० संत तुकाराम महाराज सार्थ तुकाराम गाथा / अभंग, मराठी अर्थासह अभंग क्र.१८०१ म्हणसी होऊनी निश्चिंता । हरूनियां अवघी चिंता । मग जाऊं एकांताभजन करूं । संसारसंभ्रमें आशा

Dharm
प्रेरणादायक संस्कृत श्लोक

Dharm Shlok sanskrit | धर्म पर श्लोक

Dharm Shlok sanskrit | धर्म पर श्लोक सुखार्थं सर्वभूतानां मताः सर्वाः प्रवृत्तयः । सुखं नास्ति विना धर्मं तस्मात् धर्मपरो भव ॥ सब प्राणियों की प्रवृत्ति सुख के लिए होती है, (और) बिना धर्म के सुख मिलता नहि । इस लिए, तू धर्मपरायण बन । Dharm Shlok sanskrit अथाहिंसा क्षमा सत्यं ह्रीश्रद्धेन्द्रिय संयमाः । दानमिज्या तपो

Shri
स्तोत्र

Shri Krishnashtaka Stotra | श्री कृष्णाष्टक स्तोत्र 1

Shri Krishnashtaka Stotra | श्री कृष्णाष्टक स्तोत्र श्रीकृष्णाष्टक स्तोत्र ॥ श्री गणेशाय नमः ॥ Shri Krishnashtaka Stotra | श्री कृष्णाष्टक स्तोत्र कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने । प्रणतक्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नमः ॥ वसुदेवसुतं देवं कंसचाणूरमर्दनम् । देवकीपरमानन्दं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ॥ श्रीकृष्णाष्टक स्तोत्र भजे व्रजैकमण्डनं समस्तपापखण्डनं स्वभक्तचित्तरञ्जनं सदैवनन्दनन्दनम् । सुपिच्छगुच्छमस्तकं सुनादवेणुहस्तकं अनङ्गरङ्गसागरं नमामि कृष्णनागरम् ।। १

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